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धन प्रदान और कार्य सिद्ध वस्तुऐ

शुद्ध भीमसेनी कपूर एक ऐसी चीज है। जिसका इस्तेमाल सेहत के साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी किया जाता है। कपूर मुख्य इस्तेमाल पूजा के दौरान आरती में किया जाता है। कपूर में काफी तेज गंध होती है। और यह एक अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ है। निर्माण की प्रक्रिया के आधार पर और अलग अलग देशों में कपूर के अलग प्रकार मिलते हैं। कपूर रंगहीन, सफेद या पारदर्शी स्वरुप में चूर्ण या चौकोर आकृति का होता है। बहुत कम लोग जानते हैं। कपूर का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। यहां कपूर (खानेवाले कपूर ) के फायदे और गुणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। आपने बराबर देखा होगा कि पूजा-पाठ के दौरान कपूर को जलाया जाता है।  लेकिन क्या आप जानते हैं। कि कपूर कितने तरह का होता है।  भीमसेनी कपूर क्या है। या भीमसेनी कपूर के फायदे क्या-क्या होते हैं। कपूर जलाने के फायदे क्या-क्या हैं। क्या कपूर खा सकते हैं। कि नहीं या कपूर कैसे बनाया जाता है। आइए इसके बारे में जानते हैं। भीमसेनी कपूर एक प्रकार का जमा हुआ उड़नशील सफेद तैलीय पदार्थ है। आयुर्वेद के कई ग्रंथों में पक्व, अपक्व और भीमसेनी तीन तरह के कपूर का जिक्र है। मुख्य रूप से दो तरह के कपूर प्रयोग में लाये जाते हैं। एक पेड़ों से प्राप्त होता है। और दूसरा कृत्रिम रूप से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। बाजार में बिकने वाले अधिकतर कपूर रासायनिक प्रक्रिया द्वारा तैयार किये जाता है। जो लाभ के स्थान पर हानि ही प्रदान करता है। प्राकृतिक कपूर को भीमसेनी कपूर  कहा जाता है। और यह कृत्रिम कपूर की तुलना में भारी होता है। यही कारण है। कि यह जल्दी पानी में डूब जाता है। यह जल्दी उड़ता भी नहीं है। भीमसेनी कपूर से होते है। कई आध्यात्मिक लाभ। भीमसेनी कपूर सनातम धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। हवन करने के लिए और आरती के दौरान कपूर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल के बिना धार्मिक कार्य अधूरा माना जाता है। वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक पूजा या हवन करते समय जब हम कपूर जलाते हैं।  तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। किन्तु ज्ञात रहे कि कपूर शुद्ध होना चाहिये। पैकेटबंद कपूर के ऊपर हमेशा ध्यान देकर ही लेना चाहिए । उस पर हमेशा लिखा रहता है। फ़ॉर एक्सटर्नल यूस ओनली  तभी समझ जाना चाहिए कि ये मिश्रित कपूर है। कपूर की महिमा इस मंत्र में गाई गई है। इसी मंत्र से शंकर भगवान शंकर की स्तुति की जाती है। कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि। इस मंत्र का आशय है। कि जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं। और करुणा के अवतार हैं। भुजंगों यानी सांपों का हार धारण करते हैं।  वे भगवान शंकर माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में हमेशा निवास करें और उन्हें मेरा प्रणाम है।  मैं उन्हें नमन करता हूं। मंत्र में यह स्तुति भगवान शंकर के लिए की गई है। कपूर को घर के वास्तु के लिए काफी शुभ माना जाता है। इसलिए घर में इसे रखा जाता है। ताकि घर में वास्तु के लिहाज से सदैव साकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता रहे। कपूर के कई टोटके को भाग्यवर्धक और धनवर्धक माना जाता है। जानकारों के मुताबिक कपूर के बेहद आसान उपाय के जरिए आप घर में सुख-शांति और समृद्धि ला सकते हैं। ज्योतिष और वास्तुविद के मुताबिक भीमसेनी कपूर रोजाना घर में पूजा के दौरान जरूर जलाना चाहिए। ऐसा करना वास्तु संतुलन के लिए बेहद शुभ होता है। कपूर के 10 चमत्कारिक टोटके भीमसेनी कर्पूर या कपूर मोम की तरह उड़नशील दिव्य वानस्पतिक द्रव्य है। इसे अक्सर आरती के बाद या आरती करते वक्त जलाया जाता है। जिससे वातावरण में सुगंध फैल जाती है। और मन एवं मस्तिष्क को शांति मिलती है। कपूर को संस्कृत में कर्पूर, फारसी में काफूर और अंग्रेजी में कैंफर कहते हैं। वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में भी इसके महत्व और उपयोग के बारे में बताया गया है। भीमसेनी कर्पूर के कई औषधि के रूप में भी कई फायदे हैं। हम आपको बताएंगे कि कर्पूर या कपूर से आप कैसे संकट मुक्ति होकर मालामाल बन सकते हैं। और कैसे आप अपने ग्रह और घर को भी बाधा मुक्त रख सकते हैं। पुण्य प्राप्ति हेतु :भीमसेनी कर्पूर जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं। पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु : भीमसेनी कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं। कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है। इसको दूर करने के लिए घर के वास्तु को ठीक करें। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं। तो प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ भीमसेनी कर्पूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूप में कर्पूर की 2-2 टुकड़े रख दें। बस इतना उपाय ही काफी है। आकस्मिक घटना या दुर्घटना से बचाव : आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद शुद्ध भीमसेनी कर्पूर जलाएं। हालांकि प्रतिदिन सुबह और शाम जिस घर में भीमसेनी कर्पूर जलता रहता है। उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है। सकारात्मक उर्जा और शां‍ति के लिए : घर में यदि सकारात्मक उर्जा और शांति का निर्माण करना है। तो प्रतिदिन सुबह और शाम भीमसेनी कर्पूर को घी में भिगोकर जलाएं और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाएगी। दु:स्वप्न नहीं आएंगे और घर में अमन शांति बनी रहेगी है। वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है। कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है। तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता। अचानक धन प्राप्ति का उपाय:- गुलाब के फूल में भीमसेनी कपूर का टुकड़ा रखें। शाम के समय फूल में जला दें और फूल को देवी दुर्गा को चढ़ा दें। इससे आपको अचानक धन मिल सकता है। यह कार्य आप किसी भी शुक्रवार से शुरू करके कम से कम 43 दिन तक करेंगे तो लाभ मिलेगा। यह कार्य नवरात्रि के दौरान करेंगे तो और भी ज्यादा असरकारक होगा। वास्तु दोष मिटाने के लिए : यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है। तो वहां भीमसेनी कपूर के 2 टुकड़े रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा। भाग्य चमकाने के लिए : शनिवार के दिन पानी में थोडा सा भीमसेनी कर्पूर को पीस कर पानी मे डालकर  नहाएं। यह आपको तरोताजा तो रखेगा ही आपके भाग्य को भी चमकाएगा। यदि इस में कुछ बूंदें चमेली के तेल की भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष नहीं रहेगा, लेकिन ऐसे सिर्फ शनिवार को ही करें। पति-पत्नी के बीच तनाव को दूर करने हेतु : रात को सोते समय पत्नी अपने पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति अपनी पत्नी के तकिये में भीमसेनी कपूर की 2 टुकड़े रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर कही उचित स्थान पर फेंक दें। तथा कपूर को निकाल कर शयन कक्ष में जला दें। यदि ऐसा नहीं करना चाहते हैं। तो प्रतिदिन शयनकक्ष में कर्पूर जलाएं और कर्पूर के 2 टुकड़े शयनकक्ष के किसी कोने में रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तो दूसरी रख दें। नौंवा उपाय-- धनवान बनने के लिए : रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद चांदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें। यह कार्य नित्य प्रतिदिन करेंगे तो धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा। धन की कभी कमी नहीं होगी। दसवां उपाय... विवाह हेतु विवाह में आ रही बाधा को दूर करना चाहते हैं। तो यह उपाय बहुत ही कारगर है। 36 लौंग और 6 भीमसेनी कपूर के टुकड़े लें, इसमें हल्दी और चावल मिलाकर इससे मां दुर्गा को आहुति दें। शीघ्र विवाह के योग बनते है। ग्यारहवां उपाय-- मनचाही भूमि या भवन पाने के लिए :- यह उपाय नवरात्रि के दिन करने का है। सबसे पहले उस स्थान की थोड़ी-सी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में उसे डालें। उसमें गंगा जल और भीमसेनी कपूर डालकर उसे पूजा में जौ के ढेर पर स्थापित कर दें। नवरात्र भर उस शीशी के आगे नवार्ण मन्त्र 'ऐं हीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे' का पांच माला जप करें और जौ में रोज गंगा जल डालें। नवमी के दिन थोड़े से अंकुरित जौ निकाल लें और ले जाकर मनचाही जगह पे डाल दें। कांच की शीशी को छोड़कर शेष सामग्री को नदी में डाल दें। देवी की कृपा हुई तो आपको मनचाहा घर मिल जाएगा।

2-- महा इंद्रजाल वनस्पति का उपाय क्या होता हैं। या महा इंद्रजाल छोटा भी हो सकता है। और बड़ा भी हो सकता है।  और यह सिर्फ समुद्र में ही पाया जाता है। अन्य किसी और जगह नहीं | एक समुद्री पौधा है। जिसमे ढेर सारी पतली-पतली टहनिया जुडी होती है।  ऐसा माना जाता है। की इस पौधे में पत्तिया नहीं होती  माना जाता है। कि यदि आप पर किसी ने टोना, टोटका या कोई तांत्रिक प्रयोग किया हो तो इस जड़ी से आप इस तरह के कूप्रभावों से बच सकते हैं। इंद्रजाल एक दिव्य वनस्पति हैं। जो बहोत ही कम पायी जाती हैं। यह वनस्पति जिसके पास होती हैं। उसके तो वारेन्यारे हो जाते हैं।  सुख शांति , और बरकत के मार्ग खुल जाते हैं। इस वनस्पति को विशेष तंत्र प्रणाली से सिद्ध कर के घर की दिवार पर लगा दिया जाये तो भूतो प्रेतों के हमले से बचा जा सकता हैं। , किसी की मुठ करनी , बाधा तंत्र मंत्र असर नहीं करता, ऊपरी परायी बला नहीं सताती एवं वास्तु दोषो का शमन करती हैं। मगर वो वनस्पति सिद्ध की होनी चाहिए अन्यथा इसका इस्तेमाल एक आम लकड़ी के सामान हैं। और ज्यादा क्या लिखू इस वनपस्ति के बारे में ये वनस्पति अपने आप में दिव्यता समेटे हुए हैं। इंद्रजाल की महिमा यह जड़ी मकड़ी के जाल जैसी होती है। जैसे मोर के पंख में जाल गूंथा गया हो। दरअसल यह एक समुद्री पौधा है। जिसमें पत्ती नहीं होती।  इन्द्रजाल की महिमा डामरतंत्र, विश्वसार, रावणसंहिता, आदि ग्रंथों में बताई गई है। कहते हैं कि इसे विधिपूर्वक प्रतिष्ठा करके साफ कपड़े में लपेटकर पूजा घर में रखने से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। इसमें चमत्कारी गुण होते हैं। यह समुंद्र में पाया जाने वाला पौधा होता है। ये ½ इंच से लेकर 1 फीट से 2 फीट तक इसका आकार होता है। इसका रंग काला होता है। कभी कभी ये शैवाल एवं फंगस लगा होने के कारण पीला एवं हरे रंग में भी नजर आता है। और इसकी अनेक टहनिया होती है। और कहां से आरंभ होती है। कहां से जुड़ती कहां पर खत्म होती है। यह पता नहीं चलता इसलिए इसको इंद्रजाल कहा जाता है। और मजबूती की दृष्टि से देखा जाए तो काफी मजबूत होता है। इंद्रजाल का प्रयोग इस पौधे का प्रयोग कई तरीकों में किया जाता है। तंत्र में जैसे किए कराए की काट के लिए तंत्र मंत्र का प्रभाव के लिए ऊपरी हवा के दुष्प्रभाव के लिए इसके अलावा कई इसके प्रयोग होते हैं। जैसे संतान प्राप्ति के लिए शत्रु बाधा को दूर करने के लिए नजर दोष से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। अथर्ववेद ८.८.५ में इन्द्र के जाल का वर्णन किया गया है। जिसकी सहायता से वह असुरों को वश में करता है। इस सूक्त में इन्द्र के जाल को बृहत् तथा अन्तरिक्ष आदि कहा गया है। जैमिनीय ब्राह्मण १.१३५ के अनुसार बृहत् जाल की साधना से पूर्व रथन्तर की साधनाकरनी पडती है। रथन्तर द्वारा अन्न प्राप्त होता है। जो रथ रूपी अशना/क्षुधा को शान्तकरता है। रथन्तर तथा अन्तरिक्ष आदि को स्व-निरीक्षण, अपने अन्दर प्रवेश करना,एकान्तिक साधना का प्रतीक कहा जा सकता है। योगवासिष्ठ में इन्द्रजाल के आख्यानके माध्यम से जाल अवस्था से पूर्व रथन्तर की साधना को दर्शाया गया है। इसे इन्द्रजालका पूर्व रूप कहा जा सकता है। इन्द्रजाल का उत्तर रूप क्या होगा, यह अथर्ववेद ८.८.५ केआधार पर अन्वेषणीय है। शब्दकल्पद्रुम कोश में इन्द्रजाल शीर्षक के अन्तर्गतइन्द्रजालतन्त्र नामक पुस्तक को उद्धृत किया गया है। जिसमें इन्द्रजाल के अधिपतिजालेश रुद्र का उल्लेख आया है। वर्तमान में इंद्रजाल शब्द के मुख्य रूप से तीन अर्थ प्रचलन में है! प्रथम :इंद्रजाल नामक पुस्तक के नाम से यह शब्द सर्वाधिक प्रसिद्ध है। अर्थात जिसग्रन्थ में अनेक उपयोगी सिद्धि देने वाले मंत्र - यन्त्र - तंत्र , शांतिक - वशीकरण -स्तम्भन -विदेषण -उच्चाटन - मारण आदि षट्कर्म प्रयोग विधि तथा नाना प्रकार के कौतुक व रंग आदि प्रयोजनीय वस्तुओ आश्चर्य रूप खेल , तमाशे , वैद्यक सम्बन्धी ओषधिया रसायन आदि का वर्णन हो उस शास्त्र को इंद्रजाल कहा जाता है! अभी तक प्राय:जितने भी इंद्रजाल छपे है। उनमे एक न एक त्रुटी पायी जाती है! द्वितीय इन्द्रजाल एक समुद्री पौधा है। जिसमें पत्ती नहीं होती। यह एक अमूल्यवस्तु है। इसे प्राप्त करना दुर्लभ है। इन्द्रजाल की महिमा डामरतंत्र, विश्वसार तंत्र आदिग्रंथों में पाई जाती है। इसे विधिपूर्वक प्रतिष्ठा करके साफ कपड़े में लपेटकर पूजा घर मेंरखने से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। इसमें चमत्कारी गुण होते हैं। मान्यता है कि जिस घर में इन्द्रजाल होता है। वहां भूत-प्रेत, जादू - टोने का प्रभाव नहीं पड़ता ! इसकेपूजा स्थल पर होने से घर में किसी तरह की बुरी नजर का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसकी लकड़ी को गले में पहनने से हर तरह की गुप्तशक्तियां स्वप्र में साक्षात्कार करती हैं। इन्द्रजाल के दर्शन मात्र से अनेक बाधाएं दूर होती हैं। । तृतीय :जादू का खेल भी इंद्रजाल कहलाता है। कहा जाता है, इसमें दर्शकों कोमंत्रमुग्ध करके उनमें भ्रांति उत्पन्न की जाती है। इसी प्रकार सिद्ध इंद्रजाल वनसस्पति भी जिसके पास होती है।  वह भी लक्ष्मी जी को मंत्रमुग्ध कर अपनी ओर आकर्षित करती है। कुल मिलाकर इंद्रजाल चमत्कार का एक नाम है। कौतूहल और आश्चर्य उत्पन्न करता है। असंभव दिखने वाला संभव दीखता है |यह प्राकृतिक शक्तियों का साक्षात्कार कराता है। चाहे वानस्पतिक हो ,मानवीय हो अथवा अलौकिक सिद्ध इंद्रजाल को अपने पास रखने से नजरदोष, ऊपरी बाधा, नकारात्मक शक्तियों और जादू टोने का प्रभाव आदि का प्रभाव क्षीण होता है। यह प्रबल आकर्षण शक्ति संपन्न है। अभिमन्त्रित कर ताबीज़ में भर कर धारण करने से सर्वजन पर वशीकरण प्रभाव होता है। रवि पुष्य नक्षत्र, नवरात्र, होली दीपावली इत्यादि शुभ समय में मंत्रों से इंद्रजाल वनस्पति को मंत्रों से अभिमंत्रित कर साधक अपने कर्मक्षेत्र में और अध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ प्राप्त कर सकता है।  घर के मुख्य द्वार पर सिद्ध इंद्रजाल को फ्रेम करके लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों भूत प्रेत आदि का प्रवेश नहीं होता। वास्तु दोषों का नाश होता है। रोगी व्यक्ति के दक्षिण दिशा में लगाने से मृत्यु भय नहीं होता और उत्तर में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। दुकान व्यापार स्थल के दक्षिण दिशा में लगाने से व्यापार में उन्नति होती है। और दुश्मनों प्रतिद्वंदियों द्वारा किये कराये के असर से बचाव होता है। तंत्र में जहां एक ओर ये सुरक्षा करता है। वहीँ दूसरी ओर इसके घातक प्रयोग भी है। जैसे शत्रु को मतिमूढ़ यानि पागल करना, गम्भीर त्वचा रोग लगा देना और रक्त दोष उतपन्न करना। वही चिकित्सा के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा में ये जीवन दायिनी भी है। अन्य वनस्पति यौगिकों के साथ मिलाकर ये लीवर के गम्भीर रोगों और पुरुषों के प्रोस्टेट समस्या और कैंसर के लिये अतिउपयोगी औषधि भी है। तांत्रिक ग्रंथो के अनुसार इंद्रजाल को किसी शुभ मुहूर्त में लाकर उससे सिद्ध किया जाता है। इंद्रजाल वनस्पति सिद्ध करने के लिए गंगाजल, अक्षत ,कुमकुम ,कलावा,  चंदन ,अष्टगंध ,घी ,मिट्टी के दिए ,कालीहल्दी का पेस्ट, अगरबत्ती ,ताजेफूल ,आदिक इस्तेमाल करे। सिद्ध करने की विधि: - इंद्रजाल सिद्ध करने के लिए मंगलवार अथवा शनिवार का दिन सबसे सही माना गया है। इस दिन शाम के समय शुद्ध स्नान करके अपने पूजा घर मे लाल कपड़ा बिछाए उसके उपरांत उसपर इंद्रजाल रखकर शुद्ध करनेके लिए 7 बार गंगाजल के छिटे मारे तदुपरांत इंद्रजाल के सामने धूप दीप प्रज्वलित करे व कुमकुम, अष्टगंध ,कालीहल्दी का पेस्ट मीला कर गंगाजल मिलाये व इससे एक बिंदी इंद्रजाल को लगाए व 21 बिंदी से उसके आसपास लाल कपड़े पर 21 बिंदी लगाए यानी उसके आसपास एक सर्कल बनाये । व एक माला निम्न मंत्र का जाप सिद्ध तुलसी की माला से करे। ।।ॐ नमो नारायणाय विश्वम्भराय इंद्रजाल कौतुक निर्देशाय दर्शनम कुरु कुरु स्वाहा।। इसके उपरांत उसे लाल कपड़े में बांध कर पूरी रात्रि रख वही पूजा स्थान पर दे। इस प्रकार से इंद्रजाल सिद्ध हो जाता है। ।दूसरे दिन सुबह स्नान करके उससे अपनी तिजोरी में या दुकान के गल्ले मे स्थापित करे । श्री लक्ष्मी जी का भंडार सदैव भरा रहता है।

3-- गोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग  वशीकरण चक्र गोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग गोमती चक्र एक दुर्लभ प्राकृतिक और आध्यात्मिक उत्पाद, शैल पत्थर का एक रूप है। यह भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र का दिव्य हथियार है| गोमती चक्र गोमती नदी में पाया जाता है।  गोमती चक्र भाग्य लाने के लिए माना जाता है। और विशेष रूप से आध्यात्मिक और तांत्रिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है। गोमती चक्र के एक ओर खोल की तरह ऊंचा होता है। जबकि दूसरी तरफ चक्कर की तरह जो दिखता है। एक सांप की तरह वृत्ताकार डिजाइन के साथ फ्लैट है। इसलिए इसे नाग चक्र भी कहा जाता है। । वैदिक ज्योतिष के अनुसार जिन लोगो की कुंडली में ‘नाग दोष’ या ‘सर्प दोष’ है उनके लिए सिद्धगोमती चक्र फायदेमंद है। सिद्धगोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग  आजकल हर व्यक्ति अपने या अपने घरेलू या पेशेवर जीवन में समस्याओं का बहुत सामना करना पड़ रहा है। गोमती चक्र इस तरह की समस्याओं से निपटने में बहुत उपयोगी साबित होते हैं। यहां तक कि अगर एक व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी प्रमुख समस्याए नहीं है। लेकिन वह अपने जीवन में वृद्धि को प्राप्त करने और भविष्य की समस्याओं से बचना चाहते हैं।  तो सिद्ध गोमती चक्रों का उपयोग अत्यधिक करने की सिफारिश की है। उनका उपयोग कर व्यक्ति को सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। हालांकि यह है कि आवश्यक अभिमंत्रित उपयुक्त मंत्र के साथ वे अपने उद्देश्य की सेवा कर सकते हैं। गोमती चक्र का महत्व एवं लाभ- सिद्ध गोमती चक्र वास्तु दोष को नष्ट कर देता है। 11 गोमती चक्र दक्षिण पूर्व दिशा में इमारत की नींव में दफन कर दीजए जिससे वास्तु दोष के बुरे प्रभाव दूर हो जाएगे और घर के निवासियों को लंबे जीवन और समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलेगा। 7 सिद्ध गोमती चक्र लाल कपड़े में लपेटकर , लॉकर या कैश बॉक्स में रख दीजिए  इससे देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। और कारोबार में बरकत आती है। ऐसा भी मानना है।  कि वो लोग जो सिद्धगोमती चक्र के अधिकारी है।  वह हमेशा धन, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के साथ धन्य होते है। सिद्धगोमती चक्र को बच्चों की रक्षा करने के लिए भी माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में, ग्यारह सिद्धगोमती चक्र एक लाल कपड़े में लपेटकर , इसको चावल या गेहूं कंटेनरों में भी रखा जाता है। यह खाद्य सुरक्षा के लिए होता है। सिद्धगोमती चक्र के लाभ – समृद्धि सुख अच्छा स्वास्थ्य और पर्याप्त धन बुरी शक्तियों से बचाता है।   रोगों से मुक्त करता है।  व्यवसाय विकास बेहतर भक्ति मन की शांति बच्चो की सुरक्षा समाज में प्रतिष्टा सिद्ध गोमती चक्र का उपयोग – 1.यह एक यंत्र के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह मंत्र के लिए प्रयोग किया जाता है। कई जैन साध्वी लोग, पूजा के दौरान एक विशेष यंत्र के रूप में, गोमती चक्र का उपयोग करते है। बार-बार गर्भपात होना , 5 सिद्ध गोमती चक्र लाल रंग के कपड़े में रख दीजिए और गर्भवती महिला के कमर में बाँध दीजिए इससे गर्भावस्था में पल रहे बच्चे की रक्षा होगी अगर आप किसी भी अदालत/कानूनी मुद्दों पर है। तो 11सिद्धगोमती चक्र अपने दरवाजे के प्रवेश द्वार की ओर रखे और सफलता प्राप्त करने के लिए गोमती चक्र पर दाहिने पैर रखकर बाहर कदम रखे। अगर आप दुश्मनों से पीड़ित हैं।  तो 21 नाग सिद्ध गोमती चक्र के साथ पत्रों में अपने दुश्मनों का नाम लिखे और उसे जमीन पर गाड़ दे इससे आप शत्रुओ को पराजित करने में सफल हो जाएगे | यदि पति-पत्नी वैवाहिक मतभेद में है।  तो 11 सिद्धगोमती चक्र ले और उन्हें (हलूम) जप करते हुए घर की दक्षिण दिशा में फेंक दे, इससे मतभेद समाप्त हो जाएगा और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढेगा। अगर आपके व्यापार में तरक्की या नोकरी में पदोन्नति नहीं मिल रही हैं।  तो 5सिद्ध गोमती चक्र शिव मंदिर में शिवलिंग पर प्रदान कीजिए और ईमानदारी से भगवान से अपने कार्य संपन्नता के लिए प्रार्थना कीजिये आपका कार्य अवस्य सिद्ध होगा। व्यापार/समृद्धि बढ़ाने के लिए, 6 सिद्ध गोमती चक्र लाल रंग के कपड़े में बांधकर धूप दीप दिखाए एवं मुख्य प्रवेश द्वार पर लटका दीजिए याद रखे कि आप के ग्राहक उन चक्रों के नीचे से गुजरे | यदि 11 सिद्ध गोमती चक्र लाल सिंदूर बॉक्स में रखे, तो यह घर में शांति बनाए रखता है| 11सिद्ध गोमती चक्र एक लाल कपड़े में लपेटे और चावल या गेहूं कंटेनरों में रखा जाए। तो यह खाद्य सुरक्षा के लिए अच्छा होता है। अगर आप कुछ साक्षात्कार और सफलता पाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यापार सौदों में शामिल हो रहे है।  तो 11 सिद्ध गोमती चक्र अपने जेब में रखे। इससे आपके व्यापार को मुनाफा होगा | 21 सिद्धगोमती चक्र की देवी लक्ष्मी के साथ दीवाली पर पूजा की जाती है। ताकि घर में समृधि आ सके | सिध्द गोमती चक्र भाग्यशाली आकर्षण के रूप में माना जाता हैं।  और उसे घर, दुकानें, कार्यालय आदि के लिए शांति, सुख और समृद्धि के लिए शुभ भी माना जाता है।  इसलिए सिद्धगोमती चक्र को दरवाजे पर एक कपड़े में बांध कर लटकाना चाहिए| यदि घर पर किसी व्यक्ति को अक्सर बीमारी का सामना करना पड़ रहा है।  तो21 सिद्ध अभिमंत्रित गोमती चक्र को व्यक्ति के चारो ओर घुमाए और उसको बीमार व्यक्ति के पलंग के साथ बांध दीजिए| सिद्ध गोमती चक्र भय को खत्म कर देता है।  निर्णय एवं इच्छा शक्ति को बढ़ाता है। व्यक्ति को सिद्धगोमती चक्र एक हार के रूप में पहनना चाहिए, यह आपको ऊर्जावान महसूस कराता है।  और आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।  सिद्धगोमती चक्र आपके बच्चे पर बुरी नजर के प्रभाव को निकालता है।  – अगर बच्चे अक्सर बुरी नजर से प्रभावित है।  तो फिर एक सुनसान जगह पर जाए और 6सिद्ध अभिमंत्रित गोमती चक्र बच्चे के सिर पर सात बार घुमाए (विरोधी दक्षिणावर्त) और उन्हें फेंक दीजिए और वापस पीछे देखे बिना अपने घर के लिए आ जाए | यह प्रयोग चार से पांच करते हैं।  और आप पाएंगे कि आपके बच्चे के लिए काफी हद तक बुरी नज़र से सहेजा गया है। अगर आपको लगता है कि गलत या बुरी नजर किसी भी व्यक्ति के कारण अपने व्यवसाय में विकास बाधित होता है।  तो आप 21अभिमंत्रित गोमती चक्र 3 नारियल (पूजा के लिए इस्तेमाल किया) के साथ लेना चाहिए यह सबसे महत्वपूर्ण है। क्युकी इससे आपके व्यवसाय के विकास में होगा। इसके लिए आप गोमती चक्र और नारियल की पूजा कीजिए| और फिर उन्हें एक पीले कपड़े में बाँध कर उसे अपने द्वार पर लटका दीजिए। यह आपके व्यवसाय को बुरी नजर से बचाने के लिए सबसे अच्छा उपाय है। अभिमंत्रित गोमती चक्र को दीवाली और अन्य शुभ अवसरों के समय मां लक्ष्मी के साथ पूजा करने के बाद स्थापित किया जाता हैं।   इससे आपको प्रचुर मात्रा में धन की प्राप्ति होगी और भी तरीके से अपनी आय अर्जित आय को स्थिर करने के लिए रास्ते खुल जाएगे। . यदि बच्चे को डर लगता है।  यदि आपका बच्चा बहुत डरता है।  तो इस उपाय से आपको बहुत लाभ मिलेगा। यह उपाय आपको मंगलवार के दिन करना है।   किसी भी माह के पहले मंगलवार के दिन अभिमंत्रित गोमती चक्र पर हनुमान जी के दाएं कंधे का सिन्दूर लेकर तिलक कर किसी लाल कपड़े में बांध दें और उसे बच्चे के गले में पहना दें, इससे बच्चे का डर कम हो जाएगा। तो यह है।  सिद्ध गोमती चक्र के कुछ निम्नलिखित लाभ एवं उपाय इसके अलावा भी गोमती चक्र के कई तांत्रिक उपयोग है ।जिससे हर कोई अपने जीवन को खुशहाल बना सकता है।

4-- आज के जमाने में एक दुर्लभ वस्तु हो गई है। गोरोचन गाय के शरीर से प्राप्त होता है। कुछ विद्वान का मत है। आज के जमाने में एक दुर्लभ वस्तु हो गई है। गोरोचन गाय के शरीर से प्राप्त होता है। कुछ विद्वान का मत है। कि यह गाय के मस्तक में पाया जाता है। किंतु वस्तुतः इसका नाम ‘गोपित्त’ है। यानी कि गाय का पित्त। हल्की लालिमायुक्त पीले रंग का यह एक अति सुगंधित पदार्थ है। जो पथरी की तरह जमा हुआ सा होता है। अनेक औषधियों में इसका प्रयोग होता है। यंत्र लेखन, तंत्र साधना तथा सामान्य पूजा में भी अष्टगंध-चंदन निर्माण में गोरोचन की अहम भूमिका है। गोरोचन का नियमित तिलक लगाने से समस्त ग्रहदोष नष्ट होते हैं। आध्यात्मिक साधनाओं के लिए गारोचन बहुत लाभदायी है। कहते यह भी हैं। कि गोरोचन गाय की नाभि से निकलता है। जिसका शुद्ध नाम है। (गौ पित्त) आज कल बाजार मॆ दस बीस रुपये मॆ नकली गोरोचन बहुत बिक रहा है। असली गोरोचन से हम लोग बहुत दूर होते है। गोरोचन गाय के अंदर बहुत ही कम मात्रा में होता है।  इसका रंग हल्का स्लेटी कलर मॆ कुछ मटमेले रंग जैसा होता है। और यह गोल तिकोने अथवा छोटे छोटे दाने के आकार का होता है। लोग इसे इस्तेमाल करने के लिए इसका पाउडर भी बना लेते हैं।  तांत्रिक लोग इसे विशेष कर दूसरो को वशीकरण अथवा सम्मोहन के लिये इस्तेमाल करते है। आइये जानते हैं। गोरोचन के विशेष लाभ गोरोचन का प्रयोग अधिकाँश वशीकरण व सम्मोहन के लिये तिलक के रूप में बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है। सिध्द गोरोचन से तिलक करने से इष्टदेव की कृपा प्राप्त होती है। और पितृ दोष समाप्त होता है। और देव कृपा बनी रहती है। सवा दो ग्राम शुद्ध गोरोचन और सवा दो ग्राम लाल गंधक (मैनसिल) को पीले रेशमी कपड़े मॆ बाँधकर लाभ के चौघडिया मे शुक्रवार के दिन चाँदी डिब्बी में गल्ले अथवा तिजोरि मॆ रखने से व्यापार अपूर्व तेजी से चलने लगता है। शुद्ध गोरोचन पीले कपड़े मॆ बाँधकर अपने पास रखने से सम्मोहन शक्ति बढ़ती है। और निरंतर धन का आवागमन होता रहता है। और कर्ज से मुक्ति मिलती है। पूर्णमासी के दिन सिध्द गोरोचन को पीस कर चन्दन और केसर मिलाकर तिलक करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो होती है। और गजब की सम्मोहन शक्ति बढ़ती है। यदि व्यर्थ ही समाज के लोग आपसे नफरत करते है। और आपको हानि पहुँचाना चहाते है। आपके सभी काम धंधो मे रुकावटे पेदा करते है। तो आप पूर्णमासी के दिन सवा दो ग्राम गोरोचन और 1 ग्राम रेड सल्फर (मैनसिल)और 1 ग्राम कामिया सिंदूर तीनो को बारीक पीसकर किसी भी सम्मोहन मंत्र से अभिमंत्रित करके अपने मस्तक पर तिलक लगाये फिर देखो वही समाज आपका कितना सम्मान करता है। ये तिलक सेल्समैन और बड़े उध्योग पतियो के लिये बहुत ही लाभदायक है। शुद्ध गोरोचन कस्तूरी और मैनसिल को किसी किसी रेशमी रूमाल मॆ बाँधकर अपने पास रखने से गजब की आकर्षण शक्ति बढ़ती है। दुश्मन भी सर झुकाकर चलता है। और व्यापार में वृध्दि होती है। यदि बार बार किसी के रिश्ते मे रुकावटे आती है। शादी नहीं हो रही है। तो शुक्ल पक्ष मे गुरुवार को सवा दो ग्राम गोरोचन किसी पीले कपड़े मे या चाँदी के ताबीज मे शुभ या लाभ के चौघडिया मे सीधी बाजू अथवा गले मे धारण कराये तो 6 महीने रिश्ता पक्का हो जायेगा यदि कोई लड़का लड़का लड़की एक दूसरे प्रेम करते है। और शादी करना चहाते मगर किसी कारण से आपसी बात नही बन पा रही है। तो सवा दो ग्राम गोरोचन और एक ग्राम रेड सल्फर (मैनसिल) दोनो को पूर्णमासी के दिन किसी सम्मोहन मंत्र से अभिमंत्रित करके बारीक पीसकर आधा चाँदी के ताबीज भरके गले मे धारण करे और शेष बचे हुये पाउडर से मस्तक पर तिलक करे और शुक्रवार बुधवार पूर्णमासी को अवश्य मिलते रहे तो कुछ ही समय मे दोनो एक दूसरे के जीवन साथी बन जाते है। सवा दो ग्राम शुद्ध गोरोचन और सवा ग्राम केशर को पीस कर पूर्णमासी के दिन वशीकरण मंत्र से अभिमँत्रित कर आधा चूर्ण चाँदी के ताबीज में धारण करने से अथवा तिलक करने से जबर्दस्त वशीकरण होता है। यदि बार बार आपकी जॉब मे रुकावट आ रही हो बार बार इंटरव्यू मे फेल हो रहे तो सवा ग्राम गोरोचन पीले रेशमी कपड़े मे गुरुवार को सूर्योदय के वक्त अपनी सीधी भुजा पर बाँधे सभी समस्याये समाप्त हो जायेगी अगर आपका व्यापार कुछ दिन चलने के बाद स्वतः बंद हो जाता है। या व्यापार में कम चलता है। अन्य कोई बाधा आ रही है। तो आप पूर्णमासी के दिन शुद्ध गोरोचन किसी सम्मोहन मंत्र से अभिमंत्रित करके तिलक करते हैं। तो आपका व्यापार मॆ बहुत ही तेजी के साथ प्रगति होती है। यदि कोई शत्रु अनावश्यक परेशान करता है। सवा ग्राम शुद्ध गोरोचन एक ग्राम रेड सल्फर (मेंन्सिल) शत्रु की फोटो के साथ शनिवार को रात्रि 9 बजे पीपल की जड़ के नीचे दवादे कुछ ही समय में शत्रुता स्वयं समाप्त हो जायेगीं अगर आप किसी भूत प्रेत की बाधा से परेशान हैं। तो आप दुर्गा शप्तशती के सिध्द मंत्र सर्वबाधा विनिर्मुक्तौ — से शुद्ध गोरोचन को अभिमंत्रित कर किसी ताबीज मॆ डालकर अपने गले मॆ धारण करे तो निशिचित रूप से सभी ब्याधियो का नाश हो जाता है। यदि घर परिवार मे कोई व्यक्ति बार बार बीमार पड़ जाता है। काफी इलाज कराने पर भी बीमारी पीछा नही छोड़ती है। सवा दो ग्राम शुद्ध गोरोचन चाँदी या स्वर्ण के ताबीज मे शुक्रवार शुक्ल पक्ष मंगल बार को अमृत के चौघडिया मे रोगी के गले मे धारण कराये धीरे धीरे रोग स्वत चला जायेगा  अगर बार बार आपको व्यापार मे हानि हो रही है। तो पूर्णमासी के दिन सवा दो ग्राम गोरोचन और सवा दो ग्राम लाभ के चौघडिया मे अपने गल्ले के अंदर रखे इससे धीरे धीरे आपका व्यापार बहुत तेजी के साथ गतिमान हो जायेगा. अगर घर मॆ पति पत्नी के बीच बहुत ज्यादा ग्रह क्लेश रहता है। तो दोनो किसी सिध्द वशीकरण करण मंत्र से गोरोचन को अभिमंत्रित कर इसका तिलक करे तो धीरे धीरे गृह क्लेश समाप्त हो जाता है। सिध्द गोरोचन का प्रयोग आप तिलक के रूप मे करने हजारो समस्याओ को हल कर देता है। इससे गजब की सम्मोहन शक्ति बढ़ती है। अगर कोर्ट कचहरी मे पति पत्नी के बीच तलाक का केस चल रहा है। और आप नही चहाते कि दोनो के बीच मे तलाक हो तो आप सवा दो ग्राम गोरोचन 1 ग्राम काली हल्दी और 1 ग्राम कामिया सिंदूर तीनो को पूर्णमासी के दिन बारीक पीसकर तिलक बनाले और किसी भी सिध्द सम्मोहन मंत्र से अभिमंत्रित करके कोर्ट जाते वक्त तिलक लगाये निश्चित रूप से तलाक रुक जायेगा अगर कामिया सिंदूर उपलब्ध ना हो तो रेडसल्फर (मेंन्सिल)और गोरोचन भी काफी लाभदायक होता है। यदि आपकी गाड़ी का बार बार एक्सीडेंट होता है। या गाड़ी ठीक से नही चलती है। तो शुक्ल पक्ष मंगल बार को सवा दो ग्राम गोरोचन किसी लाल रेशमी रूमाल लाभ के चौघडिया चर लग्न मे गाड़ी के अंदर रखे इससे ना तो कभी गाड़ी का एक्सीडेंट होगा और ना वह गाड़ी कभी आपको हानि पहुँचायेगी. अगर निरंतर व्यापार मे घाटा हो रहा हो तो पूर्णमा के सवा दो ग्राम गोरोचन और सवा ग्राम ब्लेक सल्फर लेकर 31बार श्री शूक्त के द्वारा अभिमंत्रित करके किसी लाल या पीले रेशमी रूमाल मे बाँधकर गुरुवार को गल्ले मे तो व्यापार मे बहुत प्रगति होती है। और बँधा हुआ व्यापार भी खुल जाता है। अगर कोई व्यक्ति घर से रूठ कर भाग गया हो तो आपके किसी बगैर धुले कपड़े सवा ग्राम गोरोचन गुरुवार को रखकर किसी भारी भारी पत्थर के नीचे दवा दे वह व्यक्ति अगर जिंदा है। तो बहुत जल्दी घर वापस आ जायेगा. अगर परिवार मे कोई व्यक्ति अकारण ही क्लेश करता है। मारपीट तोड़ फोड़ करता है। बात बात पर गुस्सा करता है। गाली ग्लौज करता है। जिससे घर परिवार मे कोई बड़ा हादसा होंने कि उम्मीद बनी रहती है। तो ऐसे व्यक्ति को आप गोरोचन कल्प की 15/15 बूँद सुबह शाम आधा कप पानी डालकर खाली पेट दे आप 24 घँटे मे उस व्यक्ति के जबर्दस्त परिवर्तन देखेगे ।

5-- हिन्दू धर्म में धन प्राप्ति के लिए कई तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। जिसके माध्यम से धन और धान्य की प्राप्ति होती है। उन्ही में से एक है हिन्दू धर्म में धन प्राप्ति के लिए कई तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। जिसके माध्यम से धन और धान्य की प्राप्ति होती है। उन्ही में से एक है।  कमल गट्टा की माला। कहते है।  कि कमल के पांचों अंगों में देवी कमला का वास होता है। देवी कमला को कमल का हर एक अंग प्रिय है।  लेकिन इन्हें सर्वाधिक प्रिय है।  कमल का बीज अर्थात कमल गट्टा। यह बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। किन्तु ये लगभग खंडित अवस्था मे रहते है। मंत्र जाप के लिए इसकी माला भी बनती है। किन्तु माला अखंडित होनी चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भारतीय धार्मिक शास्त्रों में लक्ष्मी को अत्यधिक महत्व दिया गया है। वेद और पुराण इनकी गाथा गाते नहीं थकते। यही संपूर्ण संसार का पालन-पोषण कर व्यक्ति के कर्म का निचोड़ धन के रूप में करती हैं। संपूर्ण संसार लक्ष्मी के अभाव में अर्थ विहीन है। मात्र लक्ष्मी ही अर्थ, काम, सुख, वैभव और संपन्नता प्रदान करती हैं। पदमा धन की मूल देवी  इन्हीं के कारण भगवान विष्णु अति वैभवशील हैं। लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों में से महालक्ष्मी का पदमा स्वरूप सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। पदमा ही धन की मूल देवी हैं। जिनका निवास पदम् वन में होता है। शब्द पदमा पदम् से बना है।  जिसका अर्थ होता है।  कमल इसी कारण देवी लक्ष्मी को महाविद्या कमला बुलाया गया है। कमल के फूल का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है। कमल पुष्प के बीजों की माला को कमल गट्टे की माला कहा जाता है। चंदन, तुलसी और कमलगट्टे तीनों में कमलगट्टे की माला घर में अवश्य रखना चाहिए। आओ जानते हैं।  इसके 7 प्रयोग और उसके फायदे।

1.माता लक्ष्मी की उपासना के लिए कमल गट्टे की माला शुभ मानी गई है। इसको धारण करने से लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा भुने हुए कमल के बीज या मखाने की खीर बनाकर मां लक्ष्मी को अर्पित करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती हैं।

2.इस माला को धारण करने वाला शत्रुओं पर विजयी होता है। शत्रु सामने टिक नही सकते ।

3. इस माला से कालीका माता की पूजा करने से वह जल्दी प्रसन्न होती है। मां काली की उपासना के लिए काली हल्दी अथवा कमल की माला का प्रयोग करना चाहिए।

 4.तुलसी के बीज से या कमल के बीज से बनी माला से जप किया जाता है। इसे पूजाघर में रखना चाहिए और जब भी आप इस माला को फेरते हुए अपने इष्टदेव का 108 बार नाम लेंगे तो इससे घर और मन में सकारात्मक वातावरण और भावों का संचार होगा।

5. अक्षय तृतीया, दीपावली, अक्षय नवमी के दिन इस माला से कनकधारा स्तोत्र का जप करने वाले को धनलाभ के अवसर मिलते रहते हैं।

6.कमलगट्टे के 108 बीज को घी में भिगोकर उसकी 108 बार आहुति देने से गरीबी मिट जाती है एवं अपार धन की प्राप्ति होति है। कुछ लोग लगातार 21 दिन तक ऐसा करते हैं। कुछ लोग इसमें शहद मिलाकर भी हवन करते हैं।

 7- किसी दुकान, ऑफिस या प्रतिष्ठान में कमलगट्टे की माला बिछाकर उसके ऊपर मां लक्ष्मी का चित्र रखकर पूजा करने से व्यापार में दिन-रात तरक्की होती हैं। नोट: कमलगट्टे की माला धारण करने के लिए शुक्रवार के दिन प्रात: स्नान करने के बाद 108 बार ''ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें और फिर इस माला को धारण करें।

ॐ रां रामाय नम:  श्रीराम ज्योतिष सदन, पंडित आशु बहुगुणा, संपर्क सूत्र- 9760924411

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